ख़ुशी से नहीं कोई होता फ़नाह, कैसे कर सकती है वो ये गुनाह, वो तो बस दिल से होक गुज़र जाती है, दिलों को समेटने में खुद बिखर जाती है. ये ही है ख़ुशी की कैफ़ियत। Welcome to Kaifiyat. Its human trait to have emotions so lets emote and explore the colourful world of words.
Saturday, December 15, 2012
~~~आरज़ू~~~
खुबसूरत हो तुम इतनी की, बस पाने की आरज़ू होती है,
पास जाएँ तो कैसे ये Complex feeling क्यूँ होती है,
कहानियों में सुना है, किताबों में पढ़ा है,
लेकिन अप्सराएँ भी कभी ज़मीन पर होती हैं ?
क्या यह ख्वाब है या तुम standards से परे हो,
ये नयन तुम्हारे ही ख़्वाबों से भरे हों,
ज़हन में ख़याल बन के थम जाती हो
जहाँ भी जाती हो, show stealer बन जाती हो,
यूँ ही पलकों पे अश्क मेरे सजा देती हो,
Traditional को तुम abstract बना देती हो,
यह इन्तेहाँ है या एक और जलवा तुम्हारा,
Perfection को भी perfect बना देती हो.
तुम पास होती हो तो हर season खुशनुमा होता है,
तुम्हारे आने से रेत पे पानी का गुमाँ होता है,
जब भी मेरी life में ग़मगीन समाँ होता है,
तुम चली आती हो और हर शोर बेज़ुबां होता है.
अब इस दिल की आरजू को stop करें कैसे,
Picture अपनी hit है इसे flop करें कैसे,
तुम्हें एक बार छूने की तमन्ना है.. लेकिन,
ओस की बूँद हो तुम नाज़ुक सी, तुम्हें छूएं कैसे.
(C) Deepak Babber & Rachana Kulshrestha
(Creative Concept by Deepak & creative support by Rachana)
5th Jan 2012
~~~जुदा कहाँ~~~
एक भूली तस्वीर पुरानी, छिपा यहाँ
आज एक रात सुहानी, बिता यहाँ
क्यूँ दर्द बसा के सीने में, यूँ रोता है
कोई किस्सा अपनी जुबानी, बता यहाँ
मैं तुझ में रब को पा के हैरान हूँ
तुझको भी है हैरानी, ख़ुदा कहाँ
तू भी भीड़ में तन्हा खुद को पाता है
फिर मुझसे है तेरी कहानी, जुदा कहाँ
© रचना कुलश्रेष्ठ
२७ फरवरी २०१२
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